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चिंता: बीएचयू में हर महीने आ रहे किडनी की समस्या के 500 नए मरीज, जीवनशैली में बदलाव है बड़ी वजह

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Thu, 12 Mar 2026 05:33 PM IST
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सार

बीएचयू में हर महीने किडनी की समस्या के 500 नए मरीज आ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार किडनी पर असर डालने वाले मुख्य कारणों में से एक जीवनशैली में बदलाव भी है। 

500 new kidney patients coming to BHU every month
किडनी - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

किडनी की बीमारी को पहले बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 45 साल से नीचे के लोग भी इसकी जद में आ रहे हैं। बीएचयू अस्पताल में हर महीने 500 नए मरीजों में किडनी संबंधी बीमारी की पुष्टि हो रही है। इसमें आधे से अधिक लोगों में सही तरीके से यूरिन न होने की समस्या जांच में सामने आ रही है। 

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इसके अलावा किडनी की सही बनावट न होना, मधुमेह और उच्च रक्तचाप (बीपी) भी बीमारी के कारण हैं। किडनी की बीमारी के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 12 मार्च को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। जिस तरह से मरीजों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए डॉक्टर रोगियों को बीमारी के प्रति जागरूक होने की सलाह दे रहे हैं। 
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आईएमएस बीएचयू यूरोलॉजी विभाग के प्रो. समीर त्रिवेदी का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों में किडनी की बीमारी वाले मरीज बढ़े हैं। लगभग 300 मरीज वाली ओपीडी में हर सप्ताह 35 से अधिक मरीजों में बीमारी की पुष्टि हो रही है। विभाग की ओर से सप्ताह में चार दिन अलग-अलग चिकित्सकों की ओपीडी चलती है। इस तरह हर सप्ताह 140 नए मरीजों में बीमारी की पुष्टि हो रही है। महीने का यह आंकड़ा 500 से अधिक हो रहा है।

हर महीने 1500 से अधिक मरीजों की होती है डायलिसिस 

बीएचयू अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में हर महीने 1500 से अधिक मरीजों की डायलिसिस होती है। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण डायलिसिस कराने वालों को 15 से 20 दिन तक इंतजार करना पड़ता है। विभाग के प्रो. शिवेंद्र सिंह का कहना है कि मरीजों को निर्धारित समय पर डायलिसिस के लिए बुलाया जाता है। पहले से पंजीकृत और नए मरीजों को मिलाकर हर महीने डायलिसिस की संख्या 1500 के पार पहुंच रही है।

सही तरीके से यूरिन न होने से बढ़ता है किडनी पर दबाव
प्रो. समीर त्रिवेदी के अनुसार, यूरिन में रुकावट की वजह से किडनी पर सामान्य से ज्यादा दबाव बनता है। अगर समय पर बीमारी की पहचान हो जाए तो इसे आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। नए मरीजों में 25% से अधिक लोगों में बचपन से ही किडनी की सही बनावट न होने यानी जेनेटिक कारण मौजूद हैं। लंबे समय से बीपी या डायबिटीज होने पर भी किडनी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। सामान्य व्यक्ति को 24 घंटे में लगभग 1 लीटर यूरिन होना चाहिए। इसके लिए जब भी प्यास लगे, पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। इससे यूरिन सही तरीके से रहेगा।

सप्ताह में तीन दिन चलती है स्पेशल क्लीनिक

बीएचयू अस्पताल में यूरोलॉजी विभाग की ओर से सप्ताह में तीन दिन स्पेशल क्लीनिक चलती है। मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार को। इन क्लीनिक में यूरोलॉजी से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं वाले मरीज देखे जाते हैं। शुक्रवार को आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार भी स्पेशल क्लीनिक में बैठते हैं और महिलाओं में किडनी संबंधी समस्याओं पर परामर्श देते हैं। निदेशक ने बताया कि स्पेशल क्लीनिक में आने वाले अधिकांश मरीजों में कम पानी पीने की वजह से यूरिन सही नहीं होने की समस्या होती है।

किडनी पर असर डालने वाले मुख्य कारण

  • जीवनशैली और खानपान का बिगड़ना
  • यूरिन का सही तरीके से न होना
  • किडनी में पथरी होना
  • जन्म से किडनी की सही बनावट न होना
  • बीपी और शुगर का सामान्य से अधिक होना
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