महंत नरेंद्र गिरी मौत मामला: काशी के संत समाज में शोक की लहर, घटना को बताया स्तब्धकारी, न्यायिक जांच की मांग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 20 Sep 2021 11:09 PM IST

सार

भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। उनके आकस्मिक निधन से काशी में संत समाज भी मर्माहत है। संतों ने घटना को स्तब्धकारी बताया। 
भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि
भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के आकस्मिक निधन से काशी का संत समाज भी मर्माहत है। काशी के अखाड़ों और मंदिरों में शोक की लहर है। काशी के विद्वत समाज, संत समाज और मठ-मंदिर प्रमुखों ने भी शोक जताते हुए घटना को स्तब्धकारी और सनातन समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। कहा कि वह आत्महत्या करने वाले संत नहीं थे और घटना से बड़ी साजिश की बू आ रही है। मठ-मंदिरों में उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी हुई। 
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अखिल भारतीय संत समाज के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की आकस्मिक मौत कई सवाल खड़े करती है। वह आत्महत्या करने वाले व्यक्ति नहीं थे। इसके पीछे बहुत बड़ी साजिश है। हम सीएम योगी आदित्यनाथ से मांग करते हैं है कि  पूरे मामले की जांच कराएं। 


धर्मसंघ के पीठाधीश्वर शंकर देव चैतन्य ब्रह्मचारी ने कहा कि धर्मसंघ से उनका निकट संबंध था। जब भी उनकी आवश्यकता धर्मसंघ को हुई वे हर वक्त उपलब्ध रहे। परमात्मा उनको अपने श्री चरणों में स्थान दें। यह संत समाज के साथ मेरी व्यक्तिगत क्षति है।

वहीं महामंत्री पं. जगजीतन पांडेय ने कहा कि सनातन धर्म के मजबूत स्तंभ रहे महंत नरेंद्र गिरी धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज के सिद्धांतों का ना सिर्फ अनुसरण करते थे अपितु औरों को प्रेरित भी करते रहे। धर्मसंघ परिवार उनके आकस्मिक देहत्याग से काफी मर्माहत है।
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अन्नपूर्णा मंदिर के महंत बोले- काशी से था गहरा लगाव

अन्नपूर्णा मंदिर के महंत  शंकर पुरी ने कहा कि  काशी से उनका गहरा लगाव था। वह 13 अखाड़ों के प्रतिनिधि थे और कुंभ में उनका हमेशा सहयोग मिलता था। घटना से मन आहत है। अगर उन्होंने एक बार भी अपनी पीड़ा कही होती तो हम लोग उनका पूरा सहयोग करते। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।  

अखिल भारतीय व्यास संघ के अध्यक्ष महंत बालक दास ने कहा कि  महंत नरेंद्र गिरि के निधन से संत समाज ही नहीं सनातन धर्मावलंबियों को क्षति हुई है। वह आत्महत्या करने वाले संत नहीं थे। कहीं ना कहीं उनके साथ कुछ गलत हुआ है। घटना से साजिश की बू आ रही है और जांच के बाद इसका खुलासा होगा। अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।

काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि अखाड़ा परिषद का आकस्मिक निधन स्तब्धकारी है। वह सनातन धर्म ध्वजा वाहक थे और उनके जाने से जो रिक्तता आई है उसको भरना कठिन है। भगवान शिव से प्रार्थना है कि वह उनको अपने चरणों में स्थान दें। घटना की उच्चस्तरीय जांच हो। 

काशी विद्वत परिषद ने की न्यायिक जांच की मांग

काशी विद्वत परिषद ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी के आकस्मिक निधन की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने आत्महत्या की या उन्हें विवश किया। इसका पता लगाने के लिए घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए। 

काशी विद्वत परिषद को जानकारी मिली है कि महंत नरेंद्र गिरि का शव संदिग्ध परिस्थितियों में श्रीमठ बाघंबरी गद्दी में फंदे से लटका मिला है। सुसाइड नोट मिलने की बात भी कही जा रही है। सुसाइड नोट और उसमें उल्लिखित तथ्यों की भी विवेचना करने की मांग परिषद ने की है।

क्यों जताया जा रहा शक

महामंत्री प्रो. द्विवेदी ने कहा कि इस घटना का जुड़ाव पिछली वारदातों से हो सकता है। जुलाई महीने में मुख्यमंत्री से मिलकर लखनऊ से लौटते वक्त हाईवे पर उनकी इनोवा का दुर्घटनाग्रस्त होना, पूर्व महंत सचिव महंत आशीष गिरि की संदिग्ध मौत का प्रकरण भी इसके पीछे वजहें हो सकती हैं।
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