Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi ›   Netaji Subhash Chandra Bose Jayanti 2022: Most people consider Sardanand Brahmachari to be Netaji Intelligence officer gave information in interrogation of IB

Subhash Chandra Bose Birthday: सारदानंद ब्रह्मचारी को ही नेताजी मानते हैं अधिकतर लोग, इंटेलिजेंस अधिकारी ने आईबी से पूछताछ में दी थी जानकारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 23 Jan 2022 03:26 PM IST

सार

श्यामाचरण पांडेय से आईबी भी कई बार नेताजी के बारे में पूछताछ कर चुकी है। उन्होंने बताया कि 1972 में मेरी सारदानंद ब्रह्मचारी से मुलाकात भी हुई थी। मुझसे आईबी वालों ने पूछा था कि क्या सारदानंद ब्रह्मचारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस
नेताजी सुभाष चंद्र बोस - फोटो : Social media
विज्ञापन
ख़बर सुनें

विस्तार

भारत सरकार द्वारा आजाद हिंद फौज के संस्थापक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती से गणतंत्र दिवस के उत्सव की शुरुआत करने का निर्णय स्वागत योग्य है। नेताजी स्वतंत्रता संग्र्राम की अनुपम विरासत हैं। कैथी के रहने वाले डिप्टी सेंट्रल इंटेलिजेंस अधिकारी श्यामाचरण पांडेय ने 2020 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दावा किया था कि सारदानंद ब्रह्मचारी ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे।



श्यामाचरण पांडेय से आईबी भी कई बार नेताजी के बारे में पूछताछ कर चुकी है। श्यामाचरण ने बताया कि 1972 में मेरी सारदानंद ब्रह्मचारी से मुलाकात भी हुई थी। उनका व्यक्तित्व बेहद आकर्षक था। मुझसे आईबी वालों ने पूछा था कि क्या सारदानंद ब्रह्मचारी नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं।


मैंने उनसे कहा कि यह तो मैं नहीं जानता कि वह नेताजी हैं या नहीं लेकिन सारदानंद का व्यक्तित्व महान था। श्यामाचरण पांडेय ने बताया कि दो दिसंबर 1951 को सारदानंद ब्रह्मचारी कैथी आए थे। इस दौरान पिता जी स्व. कृष्णकांत पांडेय से उनकी अकस्मात भेंट हुई और वह उनकी सेवा में अंतिम दिनों में 1977 तक समर्पित रहे। नेताजी सारदानंद नाम से 1977 तक अपनी पहचान को छिपाकर जीवित रहे। उनकेहस्तलेख, पत्रों की प्रतियां व जीवित रहने के  प्रमाण जस्टिस खोसला और जस्टिस मुखर्जी जांच आयोग के संज्ञान में डॉ. सुरेश चंद्र पाध्ये ने लाया था।

हस्तलेख विशेषज्ञों की रिपोर्ट कहती है कि नेताजी और सारदानंद द्वारा लिखे गए पत्रों की लिखावट एक ही व्यक्ति की है। सारदानंद ब्रह्मचारी अपने गंगतोली, ओखीमठ प्रवास में डॉ. पाध्ये से चर्चा के दौरान कहा था कि मैं गंगोत्री से यात्रा करते हुए टेहरी आया, एक पेड़ की छाया में आराम कर रहा था। एक व्यक्ति से समाचार पत्र लेकर पढ़ने लगा।

शरत चंद्र बोस के दुखद निधन से मुझे धक्का लगा। मेरी दुनिया उजड़ गई। नेता जी के बड़े भाई शरत चंद्र बोस की मृत्यु 20 फ रवरी 950 को हुई थी। श्यामाचरण पांडेय ने कहा कि उनके चाचा राधाकांत पांडेय अंतिम समय तक सारदानंद के साथ रहे।

सुभाष के भ्रम में उनके भाई को पुलिस ने किया गिरफ्तार
गंगतोली ओखीमठ प्रवास में डॉ. सुरेश चन्द्र पाध्ये से चर्चा के दौरान सारदानंद जी ने कई रहस्य उद्घाटन किए थे। एक मई 1966 को चर्चा के दौरान डॉ. पाध्ये ने कहा कि लोग कहते हैं कि सुभाष के भ्रम में पुलिस ने उनके बड़े भाई शरत चन्द्र बोस को गिरफ्तार कर लिया था। इस पर सारदानंद जी ने स्पष्ट किया शरत बोस नहीं पूना में सुभाष के छोटे भाई शैलेश बोस को सुभाष समझ कर गिरफ्तार किया था बाद में उसको छोड़ दिया गया। सुभाष और शैलेश के चेहरे में बहुत समानता थी।

प्रधानमंत्री से मांग, रहस्य से उठाएं पर्दा
श्यामाचरण पांडेय ने पीएम नरेंद्र मोदी से मांग की है कि डॉ. सुरेश चंद्र पाध्ये सारदानंद उर्फ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ हमेशा सक्रिया रहे। उनके शोध कार्य से प्रमाणित हुआ है कि सारदानंद जी नेताजी बोस थे। इस रहस्य से अब पर्दा उठा देना चाहिए।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00