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ज्योतिर्मठ : तहसील परिसर में रातभर धरनास्थल पर डटे रहे प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Tue, 09 Jun 2026 05:06 PM IST
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विस्थापन समेत 11 सूत्री मांगों के लिए कर रहे हैं आंदोलन
कहा- जर्जर भवनों का मुआवजा दिया लेकिन जमीन का मूल्य तय नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। ज्योतिर्मठ में विभिन्न मांगों के संबंध में भू-धंसाव प्रभावितों का 48 घंटे का धरना तहसील परिसर में मंगलवार को भी जारी रहा। प्रभावित रातभर धरनास्थल पर डटे रहे। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के साथ प्रभावित परिवार विस्थापन समेत 11 सूत्री मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
प्रभावितों का कहना है कि नगर में आई आपदा के तीन वर्ष बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है जिससे लोगों में आक्रोश है। अब तक प्रभावितों की भूमि का मूल्य निर्धारण नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से जर्जर भवनों का मूल्यांकन कर मुआवजा दिया जा चुका है लेकिन जमीन का मूल्य तय नहीं होने से लोग परेशान हैं। इसके अलावा सुरक्षित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों पर अभी रोक लगी हुई है। इस कारण कारण प्रभावित परिवार अपने रहने के लिए नए मकान नहीं बना पा रहे हैं। राजीव आवास एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में दरारें आने के बाद प्रभावित परिवारों को अब तक कोई लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं पुश्तैनी घरों का मूल्यांकन भी लंबित है जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं। नगर में सुरक्षात्मक कार्यों को लेकर भी वैज्ञानिकों ने कुछ चिंताएं व्यक्त की हैं मगर उनपर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रभावितों के समर्थन में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति भी आई है। धरने में समिति के संयोजक अतुल सती, चंडी प्रसाद बहुगुणा, हरीश लाल, पवन कुमार, नीलम परमार, देवेश्वरी देवी, नंदनी देवी, बसंती देवी और पुष्पा देवी आदि शामिल रहे।
विस्थापन समेत 11 सूत्री मांगों के लिए कर रहे हैं आंदोलन
कहा- जर्जर भवनों का मुआवजा दिया लेकिन जमीन का मूल्य तय नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। ज्योतिर्मठ में विभिन्न मांगों के संबंध में भू-धंसाव प्रभावितों का 48 घंटे का धरना तहसील परिसर में मंगलवार को भी जारी रहा। प्रभावित रातभर धरनास्थल पर डटे रहे। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के साथ प्रभावित परिवार विस्थापन समेत 11 सूत्री मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
प्रभावितों का कहना है कि नगर में आई आपदा के तीन वर्ष बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है जिससे लोगों में आक्रोश है। अब तक प्रभावितों की भूमि का मूल्य निर्धारण नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से जर्जर भवनों का मूल्यांकन कर मुआवजा दिया जा चुका है लेकिन जमीन का मूल्य तय नहीं होने से लोग परेशान हैं। इसके अलावा सुरक्षित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों पर अभी रोक लगी हुई है। इस कारण कारण प्रभावित परिवार अपने रहने के लिए नए मकान नहीं बना पा रहे हैं। राजीव आवास एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में दरारें आने के बाद प्रभावित परिवारों को अब तक कोई लाभ नहीं मिल पाया है। वहीं पुश्तैनी घरों का मूल्यांकन भी लंबित है जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ रही हैं। नगर में सुरक्षात्मक कार्यों को लेकर भी वैज्ञानिकों ने कुछ चिंताएं व्यक्त की हैं मगर उनपर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रभावितों के समर्थन में जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति भी आई है। धरने में समिति के संयोजक अतुल सती, चंडी प्रसाद बहुगुणा, हरीश लाल, पवन कुमार, नीलम परमार, देवेश्वरी देवी, नंदनी देवी, बसंती देवी और पुष्पा देवी आदि शामिल रहे।
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