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रिफ्यूजी कॉलोनी को अलविदा कह गए शरणार्थी ...

Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 14 Aug 2022 08:57 PM IST
रिफ्यूजी कॉलोनी  ।
रिफ्यूजी कॉलोनी । - फोटो : HARIDWAR
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हर शहर की तरह हरिद्वार में भी रिफ्यूजी कॉलोनी है। देश विभाजन के दौरान पाकिस्तान से आए हिंदू परिवार जहां बसे वहां का नाम रिफ्यूजी कॉलोनी पड़ा। शहर में रामनगर रिफ्यूजी कॉलोनी के नाम से जानी जाती है। यहां कभी सारे विस्थापित होकर आए परिवार रहते थे, लेकिन अब आबादी मिश्रित हो गई। कई रिफ्यूजी परिवार यहां से दूसरी जगह चले गए।

बताया जाता है कि जब 1947 में देश का विभाजन हुआ तो पाकिस्तान से 150 परिवारों ने यहां आकर शरण ली थी। तब सरकार की ओर से इन परिवारों के लिए सिंहद्वार के पास रामनगर के पास रिफ्यूजी कॉलोनी बनाई थी। हालांकि, समय बदलने के साथ-साथ रिफ्यूजी भी कॉलोनी को छोड़कर अन्य स्थानों पर अपने परिवार के साथ शिफ्ट होते रहे। फिर भी कॉलोनी में कुछ घर रिफ्यूजी परिवार बचे हैं। अब यहां करीब 40 परिवार ही रहते हैं। इन परिवारों ने मुश्किलों से जूझते हुए अपना नया संसार खड़ा किया।

विभाजन के कुछ समय बाद यहां जन्मे गंगा प्रसाद ने अपने अनुभवों अमर उजाला से साझा किया। गंगा प्रसाद ने बताया कि जब उन्होंने होश संभाला तो उस समय चारों ओर जंगल होते थे। लोग समय से अपने घरों को पहुंच जाते थे। क्योंकि यहां देर रात में चोरी और लूट की घटनाएं अधिक होती थीं। वह बताते हैं कि उस समय जमीनों की कीमत बहुत कम थी। पॉश इलाकों में पचास पैसे फुट जमीन मिला करती थी, लेकिन धन के अभाव में लोग जमीन की खरीदारी नहीं कर पाते थे।
रामनगर कॉलोनी के नीरज सचदेवा ने बताया कि विभाजन के समय उनके पिता भारत आए थे। उस समय लगभग 150 परिवार आए थे, जिनमें से कई परिवार कॉलोनी को छोड़ अन्य स्थानों पर चले गए हैं। उन्होंने अपने माता शकुंतला देवी और पिता गोविंद लाल सचदेवा के संग कारोबार कर अपने जीवन की गाड़ी को आगे बढ़ाया। संवाद
रिफ्यूजी कॉलोनी में आज सभी मूलभूत सुविधाएं है, लेकिन लोग यहां सड़क पर राजनीति करते हैं। दरअसल कॉलोनी की गलियों में बने घरों के बाहर कहीं सड़क ऊपर तो कहीं गहरी है। जिससे वहां बरसात के समय में जलभराव की समस्या होती है। रामनगर कॉलोनी की पार्षद रेणु अरोड़ा का कहना है कि यहां अब मात्र सड़कों पर लोग राजनीति करते हैं। बारिश के समय में छोटी-छोटी गलियों में बने मकानों के बाहर पानी भर जाता है। जलभराव की समस्या मुख्य सड़क का ऊंचा बना होना है।

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