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Kotdwar News: खुले आसमान में उड़ान तो भरो, उड़ना सीख ही जाओगे...
संवाद न्यूज एजेंसी, कोटद्वार
Updated Tue, 09 Jun 2026 04:56 PM IST
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मुंबई से लैंसडौन पहुंचे इंजीनियर साइकिलिस्ट ने लैंसडौन के बच्चों को दिया गुरुमंत्र
लैंसडौन। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता प्रसारित करने के लिए साइकिल से भारत भ्रमण पर निकले मुंबई के साइकिलिस्ट का लैंसडौन में स्वागत किया गया। युवा साइकिलिस्ट ने क्षेत्र के बच्चों को सीमित दायरे में न बंधकर अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।
सिविल इंजीनियर मुंबई निवासी विकास चौरसिया ने अपने लक्ष्य को मूर्तरूप देने के लिए 25 अक्तूबर 2025 को 8,000 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की थी। विकास मंगलवार को लैंसडौन पहुंचे तो उनका स्वागत किया गया। विकास ने स्थानीय बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। शिक्षा विकास का साधन है। शिक्षा से ही अच्छे व बुरे का बोध होता है।
अभिभावकों से कहा कि कई बार बच्चे जो सोचते हैं वो होता नहीं और जो नहीं सोचते वो हो जाता है। अभिभावक बच्चों को इस बात का आभास कराएं कि उनके सामने खुला आसमान है वे उड़ान भरें तो सही, आज नहीं तो कल उड़ना सीख ही जाएंगे।
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विकास ने बताया कि वे साइकिल से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा की यात्रा पूर्ण करने के बाद अब उत्तराखंड की यात्रा कर रहे हैं। रुड़की, देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार, कोटद्वार के बाद लैंसडौन पहुंचे हैं और अब तक वे 10 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। ताड़केश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष गबर सिंह बिष्ट, होटल एसोसिएशन जीएम ग्रुप के अध्यक्ष सक्षम खंडेलवाल, नितिन, नीतू, लेंसी खंडेलवाल आदि ने स्वागत किया।
लैंसडौन। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता प्रसारित करने के लिए साइकिल से भारत भ्रमण पर निकले मुंबई के साइकिलिस्ट का लैंसडौन में स्वागत किया गया। युवा साइकिलिस्ट ने क्षेत्र के बच्चों को सीमित दायरे में न बंधकर अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रेरित किया।
सिविल इंजीनियर मुंबई निवासी विकास चौरसिया ने अपने लक्ष्य को मूर्तरूप देने के लिए 25 अक्तूबर 2025 को 8,000 किलोमीटर की साइकिल यात्रा शुरू की थी। विकास मंगलवार को लैंसडौन पहुंचे तो उनका स्वागत किया गया। विकास ने स्थानीय बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया। शिक्षा विकास का साधन है। शिक्षा से ही अच्छे व बुरे का बोध होता है।
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अभिभावकों से कहा कि कई बार बच्चे जो सोचते हैं वो होता नहीं और जो नहीं सोचते वो हो जाता है। अभिभावक बच्चों को इस बात का आभास कराएं कि उनके सामने खुला आसमान है वे उड़ान भरें तो सही, आज नहीं तो कल उड़ना सीख ही जाएंगे।
विकास ने बताया कि वे साइकिल से गुजरात, राजस्थान, हरियाणा की यात्रा पूर्ण करने के बाद अब उत्तराखंड की यात्रा कर रहे हैं। रुड़की, देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार, कोटद्वार के बाद लैंसडौन पहुंचे हैं और अब तक वे 10 हजार किलोमीटर की यात्रा कर चुके हैं। ताड़केश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष जितेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष गबर सिंह बिष्ट, होटल एसोसिएशन जीएम ग्रुप के अध्यक्ष सक्षम खंडेलवाल, नितिन, नीतू, लेंसी खंडेलवाल आदि ने स्वागत किया।