साइबर अपराधियों का नया जाल: कैसे बन रहे है 'म्यूल खाते' ठगी की करोड़ों की कमाई छिपाने का जरिया, जानिए पूरा खेल
साइबर अपराध से जुड़ी काली कमाई को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल खातों के बड़े नेटवर्क का एसटीएफ ने खुलासा किया है। बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की धनराशि को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर उसकी असली स्रोत को छिपाया जा रहा था।
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ऊधमसिंह नगर जिले में साइबर अपराध की काली कमाई छिपाने के लिए म्यूल खातों के प्रयोग का बड़ा खुलासा हुआ है। साइबर थाना कुमाऊं परिक्षेत्र के दो दरोगाओं की तहरीर पर तीन अभियुक्तों पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि यह खाता दो लेयर में था और पोर्टल पर इसमें तीन शिकायतें दर्ज थीं। बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन पैटर्न और मनी ट्रेल एनालिसिस से पता चला कि खाते में आई धनराशि को तत्काल अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया और चेक, पीओएस मशीन, यूपीआई आदि के माध्यम से निकालकर आगे वितरित किया गया।
पूछताछ में महेश ने बताया कि गदरपुर निवासी हरजीत सिंह देश के विभिन्न राज्यों से रकम मंगवाकर उससे चेक के माध्यम से निकलवा लेता था। महेश के अनुसार, हरजीत ने उसके खाते में करीब 10 लाख रुपये मंगवाए थे और गांव के अन्य लोगों के खातों से भी करीब एक करोड़ रुपये की धनराशि निकलवाई थी। एसटीएफ ने दोनों पर प्राथमिकी दर्ज की है।
क्या हैं 'म्यूल खाते'
म्यूल खाते वह बैंक खाते होते हैं जिन्हें अपराधी खुद संचालित नहीं करते बल्कि उन्हें भोले-भाले लोगों के नाम पर खुलवाया जाता है या फिर उनसे उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी लेकर उनका दुरुपयोग किया जाता है। इन खातों का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराधों से प्राप्त अवैध धन को वास्तविक अपराधियों तक पहुंचाने से पहले उसे कई परतों में बांटना और उसकी उत्पत्ति को छिपाना होता है।
दोनों मामलों में, खाताधारकों के आर्थिक लाभ या कमीशन के बदले अपनी बैंक खातों की सुविधाओं को एक संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट को उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। प्रकरण में तीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कुछ अभियुक्त को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। - नीलेश आनंद भरणे, आईजी एसटीएफ