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पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने राष्ट्र कार्य को धर्म से ऊंचा दर्जा दिया: राज्यपाल

वीडियो डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 13 Feb 2021 03:31 AM IST

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन मानव कल्याण, बंधुत्व भावना तथा देश की अखंडता के लिए आवश्यक है। उन्होंने कभी परिस्थितियों से पराजित होकर समझौता नहीं किया। राष्ट्र कार्य को धर्म तथा राष्ट्र प्रेम को ईश्वर प्रेम से ऊंचा दर्जा दिया। 

राज्यपाल शुक्रवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की ओर से आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानवदर्शन सतत विकास का व्यवहार्य मार्ग विषयक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को ऑनलाइन संबोधित कर रहीं थीं। कहा कि पंडित दीनदयाल ने शिक्षा को बढ़ावा दिया। समाज को एकजुट किया। उनका विचार था कि देश का विकास भारतीय परिवेश के अनुरूप हो। सबके पास अच्छे घर हों, महिलाएं शिक्षित हों, रोजगार के अवसर हों तभी राष्ट्र भाव सही दिशा में रहेगा। इसी विचार धारा के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर स्वास्थ्य योजना के लिए 64 हजार करोड़ तथा शोध और अनुसंधान के लिए 50 हजार करोड़ रुपये आवंटित किया है। कोविड वैक्सीन को अन्य देशों को उपलब्ध कराकर भारत विश्व में मानवता की सेवा का उदाहरण भी प्रस्तुत कर रहा है। 

मुख्य अतिथि सामाजिक विचारक सुनील वी देवधर ने कहा कि एकात्म मानव दर्शन का अर्थ दूसरों के बारे में पहले सोचना है। सतत विकास तभी होगा जब हम दूसरों के बारे में सोचेंगे। विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के चेयरमैन वल्लभ भाई कथीरिया ने कहा कि दीनदयाल अपने से पहले दूसरे के हित की सोचते थे। अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख शंकर लाल ने कहा कि हमारे देश की गायों का दूध स्वादिष्ट होने के साथ-साथ अन्य देश की गाय से अधिक पोषण युक्त है। ये बात रिसर्च में भी साबित हो चुकी हैं। 

दीनदयाल के विचारों और विजन पर तीन क्रेडिट का कोर्स शुरू होंगे
कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि दीनदयाल के विचारों से युवाओं को जोड़ने के लिए पहली बार साप्ताहिक समारोह का आयोजन किया जा रहा है। दीनदयाल के विचारों और विजन पर तीन क्रेडिट का कोर्स शुरू किए जा रहे हैं। यह नॉन-क्रेडिट कोर्स विश्वविद्यालय के हर छात्र के लिए अनिवार्य होगा। इसके साथ ही मास्टर्स इन पॉलिटिकल साइंस में दीनदयाल, लोहिया और महात्मा गांधी के विचारों का तुलनात्मक अध्ययन होगा। कुलपति ने बताया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित यह सेमिनार रविवार तक चलेगा। इसमें 42 सत्र होंगे। 12 विशेष व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।

इनकी रही मौजूदगी
अखिल भारतीय संत समिति गंगा सभा के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, गोरक्षप्रांत प्रचारक सुभाष, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के डॉ. बालमुकुंद पांडेय, कमलेश, पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो. जीसीआर जायसवाल, प्रो. एचके सिंह, वीरेंद्र सिंह, अनिल सिंह, विश्वविद्यालय की प्रथम महिला सुमिता सिंह, पूर्व मेयर डॉ. सत्या पांडेय की मौजूदगी रही। कार्यक्रम का संचालन मानवेंद्र सिंह और आभार ज्ञापन पंडित दीनदयाल शोध पीठ के निदेशक प्रो. संजीत गुप्ता ने किया।

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