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My Village, My Pride: Former Deputy Prime Minister Chaudhary Devi Lal shared a deep, long-standing bond with Mundhal; now, a daughter of the village has become a Judge.
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मेरा गांव मेरी शान; पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल का मुंढाल से था पुराना नाता, गांव की बेटी बनी है जज
जिले की उत्तर दिशा में अंतिम छोरे पर बसे गांव मुंढाल के लोग केवल खेती तक ही सीमित नहीं है। यहां के लोगों की देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री तक पहुंच रहने के साथ ही गांव के मेहनत युवा अपनी मेहनत के दम पर न्यायिक प्रणाली का हिस्सा बनकर लोगों को न्याय दिला रहे है। गांव के जवान सेना में मेजर रैंक हासिल कर देश सेवा कर रहे है। वहीं, गांव मुंढाल के जगत सिंह मुंढाल हल्के से विधायक का चुनाव लड़कर अपना भाग्य अजमा चुके है। ऐसे में मुंढाल के ग्रामीण राजनीतिक, प्रशासनिक सेवाओं के साथ-साथ मुख्य रूप से धान की खेती करते है।
दरअसल, जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर दिल्ली सिरसा राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 9 पर स्थित गांव मुंढाल की ख्याति राजनीतिक, प्रशासनिक सेवाओं की बदौलत देश-विदेश तक विख्यात है। देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री व प्रदेश में 1977 तथा 1987 में दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे चौधरी देवीलाल जब भी किसी राजनीतिक या सामाजिक कार्यक्रम के दौरान गांव मुंढाल से होकर गुजरते थे तो वे गांव के स्वर्गीय मुख्त्यार नाई के बस स्टैंड स्थित खोखे पर चाय पीए बगैर नहीं जाते थे। पहली बार चौधरी देवीलाल ने 1964 में मुख्त्यार नाई के हाथ की बनी चाय की चुसकी ली थी। चाय ने चौधरी देवीलाल का मुख्त्यार नाई से ऐसा नाता जोड़ा की आखिरी सांस तक बना रहा। वहीं, गांव की अन्य बेटियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बनीं मुंढाल कला की बेटी ज्योति शर्मा अपनी मेहनत के दम पर लोगों को न्याय दिला रही है। गांव में ही पली बढ़ी ज्योति शर्मा की बचपन से ही न्यायिक प्रणाली में जाने की इच्छा थी। ज्योति शर्मा फिलहाल उत्तर प्रदेश के मेरठ में अपनी सेवाएं दे रही है। इसके अलावा ग्रामीण आंचल के निकले गांव मुंढाल कला के विजय कुमार सेना में मेजर के पद पर कार्यरत है। जिसने गांव के राजकीय स्कूल से ही शिक्षा ग्रहण की है। सेना में जाने के लिए विजय में इतना जज्बा था कि उसने अपनी मेहनत के दम पर पहली ही प्रयास में कैप्टन के पद पर चयनित हुआ था। बाद में प्रमोशन होने पर विजय ने मेजर के पद पर ज्वाइन किया था। वहीं, गांव मुंढाल राजनीतिक क्षेत्र से भी काफी प्रभावशाली रहा है। सन 2005 में हुए अंतिम परिसीमन में मुंढाल हल्के को आधिकारिक रूप से तोड़ दिया गया था। मुंढाल हल्के से अंतिम विधायक सन 2005 में पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल के पुत्र रणबीर सिंह महेंद्रा थे। जिसके बाद मुंढाल हल्के के विभिन्न गांवों को अन्य विधानसभा क्षेत्रों में जोड़ दिया गया था।
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