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My Village, My Pride: Daughters of Kosli—the 'Village of Soldiers'—Are Making a Name for Themselves in Sports
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मेरा गांव मेरी शान: सैनिकों के गांव कोसली की बेटियां खेलों में चमका रहीं नाम
कोसली गांव लंबे समय से सैनिक बाहुल्य गांव के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है। जबकि इसी गांव की बेटियां खेलों के मैदान में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। एशियन गेम्स में बॉक्सिंग में सिल्वर मेडल जीतने वाली पवित्रा यादव से प्रेरणा लेकर गांव की कई बेटियां खेलों में अपना भविष्य संवारने में जुटी हुई हैं।
वर्ष 2018 के एशियन गेम्स में पवित्रा यादव ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए सिल्वर पदक जीतकर कोसली गांव को नई पहचान दिलाई थी। खास बात यह रही कि उन्होंने सेमीफाइनल मुकाबले में पाकिस्तान की खिलाड़ी को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। भले ही वह गोल्ड मेडल से चूक गईं, लेकिन उनके प्रदर्शन ने गांव की बेटियों में नया आत्मविश्वास भर दिया।
पवित्रा यादव की उपलब्धियों से प्रेरित होकर गांव की कई बेटियां अब बॉक्सिंग सहित अन्य खेलों में कड़ी मेहनत कर रही हैं। गांव की बेटी रेखा यादव ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सिल्वर मेडल जीतकर गांव का नाम रोशन किया है। खेलों के साथ-साथ वह अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही हैं। वहीं, बॉक्सिंग खिलाड़ी शर्मिला ने हरियाणा स्टेट प्रतियोगिता में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की है। गांव के खिलाड़ी हैप्पी सिंह सीनियर स्टेट प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीत चुके हैं और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुके हैं।
बेटियां भी खेलों के माध्यम से प्रदेश और देश में पहचान बना रही:
गांव के पंचायत पंच ओमप्रकाश ने बताया कि जिस प्रकार गांव के युवाओं ने सेना में देश का नाम रोशन किया है, उसी तरह अब बेटियां भी खेलों के माध्यम से प्रदेश और देश में पहचान बना रही हैं। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों का लक्ष्य खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल कर देश का गौरव बढ़ाना है।
बॉक्सिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कोच ममता यादव ने प्रेरित किया। साथ ही एशियन गेम्स पदक विजेता पवित्रा यादव से भी उन्हें काफी मोटिवेशन मिला। इसके बाद उन्होंने बॉक्सिंग रिंग में उतरकर कड़ी मेहनत शुरू की। उनका अगला लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर प्रदेश और देश का नाम रोशन करना है। इसके लिए वह लगातार अभ्यास कर रही हैं और बेहतर प्रदर्शन की तैयारी में जुटी हुई हैं। शर्मिला, बॉक्सिंग खिलाड़ी
खेलों के साथ-साथ वह अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रही हूं। लक्ष्य है कि अपने गांव का नाम रोशन करूं। इसके लिए दिन रात मेहनत कर रही हूं। रेखा, बॉक्सिंग खिलाड़ी
कोसली गांव प्रतिभाओं से भरा हुआ है। गांव की बेटियां आज देश-प्रदेश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। इसका श्रेय बॉक्सिंग कोच ममता को दिया जाना चाहिए, जो बच्चों को लगातार प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं।
गांव में बने स्टेडियम का भी खिलाड़ियों को बड़ा लाभ मिल रहा है। यहां बच्चे नियमित अभ्यास कर रहे हैं और बेहतर सुविधाओं का फायदा उठाकर खेलों में आगे बढ़ रहे हैं। गांव के लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में कोसली की बेटियां देश के लिए और भी बड़े पदक जीतकर गांव का नाम रोशन करेंगी। -कैलाश बाई, पूर्व ब्लॉक चेयरमैन
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