अमर उजाला
Thu, 21 May 2026
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में समय-समय पर ग्रह-नक्षत्रों के संयोग से दुर्लभ और शक्तिशाली योग बनता है
ज्योतिष में गुरु-पुष्य नक्षत्र योग को दुर्लभ, शक्तिशाली, समृद्धिकारी, लाभकारी और शुभ संयोग माना जाता है
गुरु-पुष्य नक्षत्र शुभ योग तब बनता है जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र संयोग का निर्माण होता है
गुरु-पुष्य नक्षत्र योग में शुभ काम करना, नई संपत्ति की खरीदारी करना और निवेश करना बहुत ही फलदायी माना जाता है
हिंदू धर्म में पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा माना जाता है और जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है तो गुरु-पुष्य योग बनता है।
गुरु-पुष्य योग में पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता देवगुरु बृहस्पति है और इनके स्वामी देव शनि महाराज होते हैं।
गुरु-पुष्य योग में सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है और नया काम शुरू करने के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है
किस दिन लगेगा सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण ?