अमर उजाला
Thu, 24 April 2025
कार की सेफ्टी रेटिंग के बारे में तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि टू-व्हीलर की सेफ्टी रेटिंग क्यों नहीं होती?
दुनियाभर में कारों को क्रैश टेस्ट के बाद 0-5 स्टार तक की रेटिंग दी जाती है, जो उनकी मजबूती को दर्शाती है।
लेकिन कारों की सेफ्टी मापने का यह सिस्टम बाइक और स्कूटर जैसे टू-व्हीलर में नहीं होता।
दरअसल, कारों का स्ट्रक्चर यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए बनाया जाता है, जबकि बाइक या स्कूटर में सेफ्टी नहीं होती।
इसलिए कार के स्ट्रक्चर कितना सुरक्षित है यह जानने के लिए रेटिंग आधारित क्रैश टेस्ट की जरूरत होती है।
2-व्हीलर्स में सेफ्टी के लिए डिस्क ब्रेक, ट्रैक्शन कंट्रोल और एबीएस जैसे फीचर्स होते हैं।
दोपहिया वाहनों की सेफ्टी के लिए ग्लोबल लेवल पर कोई पैरामीटर नहीं है। इसलिए भी इनकी कोई सेफ्टी रेटिंग तय नहीं है।
हालांकि, टू-व्हीलर के साथ आने वाले गियर्स जैसे हेलमेट का स्टैंडर्ड तय किया जाता है। भारत में इनका ISI प्रमाणित होना अनिवार्य है।
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