अमर उजाला
Sun, 25 June 2023
अगर चंद्रमा नहीं होता तो ऊपरी तौर पर रातें हमेशा तारों वाली होतीं लेकिन दूसरे मायनों में पृथ्वी पर बहुत कुछ बदल जाता
अगर चंद्रमा नहीं होता तो ज्वारीय प्रभाव नहीं होता यानि हमारे समुद्र और महासागरों में ज्वारभाटा नहीं आते वे केवल तूफानों और तेज हवाओं के समय होतीं
खगोलीय ज्वारीय बल के मामले में पृथ्वी केवल सूर्य के प्रभाव में होती जबकि ज्वारीय बल के कारण चंद्रमा ने सूर्य के बल को कम किया हुआ है
साथ ही हमारी पृथ्वी के घूमने की गति भी अधिक होती और हमारे दिनों की लंबाई भी कम होती और चौबीस घंटों में हम चार सूर्योदय और सूर्यास्त देखते
केवल इन बदलाव से ही बहुत से नतीजे बदल जाते और पूरी की पूरी दुनिया ही बदल जाती
जीवन की बहुत सी प्रक्रियाएं कभी विकसित ही नहीं हो पाती या आज के मुकाबले बहुत अलग होती
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