भगवान बदरीनाथ के अभिषेक और पूजा के लिए ऐसे तैयार होता है खास तेल, तस्वीरों में देखें

अमर उजाला

Wed, 12 April 2023

Image Credit : अमर उजाला
बदरीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 27 अप्रैल को खुलेंगे। बुधवार से धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें सबसे पहले भगवान बदरी विशाल को यात्राकाल में लगाए जाने वाले तेल को पिराने(पीसने) की प्रक्रिया शुरू हुई। 
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डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी ने बताया कि परंपरा है कि भगवान बदरी विशाल को प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में चार बजे स्नान कराया जाता है। स्नान के उपरांत तिलों के तेल से भगवान बदरी विशाल का लेपन(मालिश) की जाती है। 

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तिलों के तेल को भगवान के अभिषेक के लिए शुद्ध माना जाता है। साथ ही इसे अखंड ज्याति में भी प्रयोग किया जाता है। इसलिए इस तेल को सिलबट्टे पर पीसा जाता है। जिससे इसमें कोई मिलावट न हो। 

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परंपरा है कि यह तेल सुहागिन महिलाएं ही पिरोती हैं। यह तेल टिहरी राजदरबार की महारानी के साथ मिलकर पीसा जाता है। इसके बाद इसे एक कलश में रखा जाता है जिसे गाडू घड़ा कहते हैं। 
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महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह की मौजूदगी में शहर की कई सुहागिनों ने तेल निकाला। गणेश पूजन, मूसल पूजन, ओखल पूजन और अग्नि पूजन के बाद शहर की कई सुहागिनों और महारानी ने पीले वस्त्र धारण कर तिलों को कड़ाई में भूना और ओखली और सिलबट्टा में पिसाकर तेल निकाला।

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गाडू घड़े को 27 अप्रैल सुबह 7.10 बजे बदरीनाथ के कपाट खुलने के मौके पर गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। डिम्मर धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्यों ने भोग बनाकर प्रतीकात्मक रूप से भगवान बदरी विशाल को भोग चढ़ाया। 

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26 अप्रैल को गाड़ू घड़ा यात्रा उद्धव और कुबेर की डोली के साथ शाम को बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। 27 अप्रैल सुबह 7.10 बजे बजे बदरीनाथ के कपाट खुलने के साथ ही गर्भगृह में स्थापित की जाएगी। जिसके बाद रोजाना भगवान बदरी विशाल को इस तेल का लेपन किया जाएगा। 
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