हरिद्वार में इस जगह पिंडदान करने से पितरों को मिलता है मोक्ष, भगवान विष्णु से है नाता
अमर उजाला
Fri, 29 September 2023
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वैसे तो पितृ पक्ष में किसी भी धार्मिक स्थल पर श्राद्ध किया जा सकता है, लेकिन धर्मनगरी हरिद्वार के नारायणी शिला पर तर्पण करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिए देशभर के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां कुशावर्त घाट पर स्नान कर पिंडदान करने का विशेष महत्व है।
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कुशावर्त घाट को भगवान दत्तात्रेय की समाधि स्थली भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इसी घाट पर पांडवों और श्रीराम ने अपने पितरों का पिंडदान किया था।
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एक बार जब गयासुर नाम का राक्षस देवलोक से भगवान विष्णु यानी नारायण का श्री विग्रह लेकर भागा तो नारायण के विग्रह का धड़ यानी मस्तक वाला हिस्सा बदरीनाथ धाम के ब्रह्मकपाली नाम के स्थान पर गिरा।
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उनके कंठ से नाभि तक का हिस्सा हरिद्वार के नारायणी मंदिर में गिरा और चरण गया में गिरे। नारायण के चरणों में गिरकर ही गयासुर की मौत हो गई। यानी वहीं उसको मोक्ष प्राप्त हुआ था।
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हरिद्वार में नारायण का साक्षात हृदय स्थान होने के कारण इसका महत्व अधिक इसलिए माना जाता है क्योंकि मां लक्ष्मी उनके हृदय में निवास करती हैं। इसलिए इस स्थान पर श्राद्ध कर्म का विशेष महत्व है।
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