इस मंदिर में माता पार्वती ने भोलेनाथ से शादी के लिए तीन हजार साल तक की थी कठोर तपस्या
अमर उजाला
Mon, 17 July 2023
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आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो माता पार्वती और भगवान शिव के अटूट प्रेम का साक्षी है। सावन में इस मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ उमड़ी है।
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यह मंदिर है हरिद्वार का बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर। बिल्केश्वर मंदिर का सबसे पहले जिक्र स्कंद पुराण के केदारखंड में आता है।
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कहा जाता है कि इस मंदिर में बिल्व के वृक्ष के नीचे बैठकर माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए तीन हजार साल तक कठोर तपस्या की थी।
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उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें दर्शन दिए और विवाह का वरदान भी दिया। इसी बिल्व के वृक्ष के नीचे शिवलिंग स्थापित है।
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शिव की उपासना के दौरान माता पार्वती ने बेल खाकर अपनी भूख को शांत किया। इसलिए यहां बेलपत्र चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है।
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मान्यता है कि अगर कोई कन्या जिसका विवाह न हो रहा हो वो यहां आकर बेलपत्र चढ़ाकर अपनी मनोकामना बोले तो उनकी शादी की मनोकामना जरूर पूरी होती है।
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कहा जाता है जब माता को प्यास लगी तो ब्रह्मा जी ने उन्हें अपने कमंडल से पानी दिया। जो कि एक कुंड के रुप में यहां है। इस कुंड को गौरी कुंड नाम से जानते हैं। जिसके जल को गंगा की तरह पवित्र बताया जाता है। लोग इस जल से शिवलिंग पर अभिषेक भी करते हैं।