यहां महादेव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने दी थी अपने नौ सिरों की आहुति

अमर उजाला

Tue, 18 July 2023

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आज हम आपको ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो महादेव के सबसे बड़े भक्त लंकापति रावण से जुड़ा है। यह मंदिर स्थित है उत्तराखंड में चमोली जनपद के नंदानगर क्षेत्र में।
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यहां भोलेनाथ का भव्य मंदिर स्थित है। इस स्थान को बैरासकुंड के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रावण ने अपने नौ सिरों की आहुति दी थी। 

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बताया जाता है कि रावण जैसे ही यज्ञकुंड में अपने दसवें सिर की आहुति देने लगे, तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें सिर की आहुति देने से रोक लिया। रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर भोलेनाथ ने उन्हें बलशाली होने और मृत्यु पर विजय पाने का वरदान दिया था।
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स्कंद पुराण के केदार खंड में बैरासकुंड का दसमोलीश्वर के नाम से उल्लेख किया गया है। बैरासकुंड में जिस स्थान पर रावण ने शिव की तपस्या की वह कुंड, यज्ञशाला और शिव मंदिर आज भी यहां विद्यमान है।

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कुछ समय पहले बैरासकुंड मंदिर के समीप खेत में खुदाई के दौरान एक जलकुंड मिला था, जबकि आस-पास खुदाई करने पर प्राचीन ईटें निकलती हैं। मंदिर के शिवलिंग पर शिव और पार्वती की हल्की आकृति दिखाई देती है। 
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नंदप्रयाग-नंदानगर मोटर मार्ग पर स्थित मंगरोली गांव में प्राचीन बैलपत्री का पेड़ स्थित है। सावन माह में इस बेलपत्री की पत्तियां जनपद के प्रसिद्ध शिवमंदिरों में अर्पित की जाती हैं। 
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बैरासकुंड मंदिर के दर्शन के कलिए सावन माह में भक्तों का तांता लगा रहता है। शिवरात्रि पर्व पर यहां दो दिनों तक मेले का आयोजन भी किया जाता है। 

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