सावन में अपने ससुराल से ही ब्रह्मांड की सत्ता चलाते हैं भगवान शिव, जानें रोचक कहानी
अमर उजाला
Mon, 10 July 2023
Image Credit : सोशल मीडिया
सावन का महीना शुरू हो गया है। साथ ही कांवड़ यात्रा का भी शुभारंभ हो गया है। ऐसे में हम शिवभक्तों को ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पूजा करने से उन्हें पूजा का दोगुना फल मिलेगा।
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मान्यता है की सावन के महीने में भगवान शिव अपने ससुराल यानी हरिद्वार की दक्ष नगरी कनखल में ही विराजते हैं। यहीं से वे पूरे ब्रह्मांड की सत्ता को संचालित करते हैं।
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कहा जाता है कि भगवान शिव ने अपने ससुर दक्ष प्रजापति का सिर जब धड़ से अलग कर दिया था तो सभी देवताओं के आग्रह पर उन्होनें राजा दक्ष को बकरे का सिर लगाकर पुर्नजीवन दिया।
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इसके बाद राजा दक्ष के आग्रह पर ही उन्होंने वचन दिया था कि साल में एक बार पूरे सावन के महीने वह कनखल में ही निवास करेंगे। इसीलिए यहां पर शिव का आशीर्वाद पाने के लिए हर साल भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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सावन के महीने में हरकी पैड़ी के जल से भोलेनाथ का जलाभिषेक करने का अपना महत्व है। पुराणों के अनुसार, शिव चतुर्दशी के दिन भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से वे अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
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दूर दूर से श्रद्धालु कनखल के दक्ष मंदिर में शिव का जलाभिषेक करने के लिए आतें हैं। श्रद्धालु दूध, दही और गंगा जल से शिव का जलाभिषेक करते हैं।
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इस मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाते ही दिखती है भक्त की तस्वीर, मुर्दों के भी जिंदा होने का दावा