भारत में यहां है 'पनीर विलेज', अनोखी है इसकी कहानी

अमर उजाला

Mon, 24 July 2023

Image Credit : गंगा थपलियाल/अमर उजाला
उत्तराखंड में वैसे तो कई गांव हैं जिनकी किसी न किसी वजह से अपनी पहचान है, लेकिन हम आपको ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जो देशभर में पनीर विलेज के नाम से फेमस है। अब इस गांव का नाम पनीर विलेज क्यों पड़ा ये आगे जानते हैं। 
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टिहरी जिले के रौतूकीबेली गांव की पहचान आज पनीर विलेज के रूप में है। यह गांव देहरादून-मसूरी-थत्यूड़-उत्तरकाशी- टिहरी को जोड़ने वाले थत्यूड़-भवान सड़क के किनारे बसा है। जो मसूरी से लगभग 17 किमी की दूरी पर स्थित है। 
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गांव को पनीर विलेज की पहचान दिलाने के पीछे ग्रामीणों का 45 साल का संर्घष है। अब यहां से लोग कमाने शहर नहीं जाते। बल्कि घर-घर में पनीर तैयार कर गांव के प्रत्येक परिवार को स्वरोजगार से जोड़ने की  मुहिम निरंतर चल रही है।
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शुद्धता और गुणवत्ता के कारण ही यहां पनीर की डिमांड लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में गांव में निवासरत 253 परिवारों में से लगभग 150 परिवार पनीर बेचकर गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

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रौतूकीबेली गांव के 60 प्रतिशत घरों में हर दिन घर के दूध से गांव की महिलाएं और पुरुष पनीर तैयार करते है। रात को घरों में पनीर बनाकर उसे सुबह गांव के बाजार में दुकानदार को बेचा जाता है। जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होती है। 

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ग्राम प्रधान भाग सिंह भंडारी ने बताया कि गांव के लोग प्रतिदिन लगभग 80 से 90 किलो तक पनीर का उत्पादन करते हैं। पनीर की गुणवत्ता इतनी बढ़िया है कि जो एक बार यहां से पनीर ले जाता है वो हमेशा और अधिक मात्रा में पनीर की डिमांड करता है।
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गांव के पूर्व ब्लॉक प्रमुख कुंवर सिंह रावत ने बताया कि 1976 में उन्होंने दो-तीन लोगों के साथ घर में पनीर बनाने का काम शुरू किया था। एक किलो पनीर उस वक्त पांच रूपये में बिकता था। 
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कुछ समय तक पनीर का काम मंदा चला। जैसे ही उत्तराखंड राज्य बना और क्षेत्र में संसाधन लगातार बढ़ते गए तो पनीर का कारोबार फिर से चलने लगा। 

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