तिरंगे के राष्ट्र ध्वज बनने की कहानी, यहां पढ़ें

अमर उजाला

Thu, 26 January 2023

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जश्न-ए-आजादी हो या गणतंत्र दिवस का आयोजन हो या फिर हो कोई जनांदोलन देश में हर खास कार्यक्रम में तिरंगा नजर आता है।

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लेकिन इस तिरंगे की कहानी बहुत लंबी है। बीते 117 साल में छह बार भारत का झंडा बदला गया है। हालांकि, ये बदलाव स्वराज प्राप्ति तक ही हुए थे।

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भारतीय ध्वज में आखिरी बदलाव 1947 में हुआ था, उस वक्त इसे तिरंगे का नाम भी दिया गया। आइए जानते हैं तिरंगे के राष्ट्रीय ध्वज तक का सफर ... 
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पहला झंडा 1906 में सामने आया। इसमें ऊपरी हरी पट्टी में आठ कमल के सफेद फूल, बीच की पीली पट्टी में नीले रंग से वन्दे मातरम् और नीचे वाली लाल पट्टी में सफेद चांद-सूरज अंकित थे।

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1907 में दूसरा झंडा प्रस्तावित हुआ। इसमें केसरिया, पीली व हरी पट्टी थी। बीच में वन्दे मातरम् लिखा था। वहीं, इसमें चांद और सूरज के साथ आठ सितारे भी थे। 

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1917 में एक और नया झंडा आया। इसमें पांच लाल व चार हरी पट्टियां थीं। झंडे के अंत में काले रंग में त्रिकोण बना था। बाएं तरफ के कोने में यूनियन जैक था। एक चांद और तारे के साथ सात तारे भी थे। 

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1921 में गांधीजी ने इसमें सफेद रंग की एक पट्टी और जुड़वाई। देश के विकास को दर्शाने के लिए चलता हुआ चरखा भी लगाया। फिर इसे आजाद भारत के राष्ट्र ध्वज के लिए स्वीकार किया गया। 

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झंडा 1931 में एक बार फिर से बदला गया। नए झंडे में ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरी पट्टी बनाई गई। सफेद पट्टी में चरखा भी दर्शाया गया। इसे इंडियन नेशनल कांग्रेस ने स्वीकार किया था।

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1947 में आजादी के साथ हमें तिरंगा झंडा मिला। इसमें ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और नीचे हरी पट्टी बनाई गई। सफेद पट्टी में चरखे की जगह 24 तीलियों वाले अशोक चक्र को गहरे नीले रंग में दर्शाया गया है। 

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