भाषा, रिश्तों और शायरी पर क्या कहते हैं जावेद अख्तर?

अमर उजाला

Wed, 17 January 2024

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मशहूर गीतकार और कवि जावेद अख्तर आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं, इस मौके पर जानते हैं भाषा, रिश्तों और जिंदगी पर कही गईं उनकी वे बातें, जो उन्होंने अपने अलग-अलग इंटरव्यू में कहीं
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'जिंदगी हर कदम पर एक दोराहा है, जब आपको समझ नहीं आता कि आप किस तरफ जाएं, अक्सर यह दोराहा राम और जग के बीच होता है'
 

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'अगर एक साथी आपके साथ रहने के लिए संघर्ष कर रहा है तो वह खुश नहीं रह सकती' 

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'मेरी जिंदगी में दो औरते हैं जिनसे मेरे बहुत ही अच्छे रिश्ते हैं, एक का शादी कुछ नहीं बिगाड़ साकी और दूसरे का तलाक कुछ नहीं बिगड़ा सका। मैं हनी के साथ बहुत दोस्ताना हूं और निश्चित तौर पर शबाना मेरी सबसे अच्छी दोस्त है'
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'उसूल ही तो हमको संभाले हुए हैं, वह हमारी जड़ों में हैं, जैसे पेड़ आंधी, तूफान आने पर भी हिलता तो है लेकिन अपनी जड़ नहीं छोड़ता, और अगर जड़ छोड़ देता है तो वह खत्म हो जाएगा' 

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'हमने तरक्की बहुत की है, पहले तो मध्य वर्ग कारों के बारे में सोच भी नहीं सकता था, लेकिन हमसे भूल हुई कि इस तरक्की में अदब, शायरी जैसी चीजें पीछे छूट गईं'

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'मैं हिंदुस्तानियों के लिए हिंदुस्तानी लिख रहा हूं, मैं उर्दू वालों और हिंदी वालों के लिए नहीं लिख रहा हूं, मैं हिंदुस्तानियों के लिए लिख रहा हूं' 
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