अमर उजाला
Wed, 17 January 2024
'जिंदगी हर कदम पर एक दोराहा है, जब आपको समझ नहीं आता कि आप किस तरफ जाएं, अक्सर यह दोराहा राम और जग के बीच होता है'
'अगर एक साथी आपके साथ रहने के लिए संघर्ष कर रहा है तो वह खुश नहीं रह सकती'
'उसूल ही तो हमको संभाले हुए हैं, वह हमारी जड़ों में हैं, जैसे पेड़ आंधी, तूफान आने पर भी हिलता तो है लेकिन अपनी जड़ नहीं छोड़ता, और अगर जड़ छोड़ देता है तो वह खत्म हो जाएगा'
'हमने तरक्की बहुत की है, पहले तो मध्य वर्ग कारों के बारे में सोच भी नहीं सकता था, लेकिन हमसे भूल हुई कि इस तरक्की में अदब, शायरी जैसी चीजें पीछे छूट गईं'
'जय संतोषी मां' फिल्म से घर घर में मशहूर हुई थीं अनीता गुहा