'कटहल' के चटपटे डायलॉग, अचार से ज्यादा टेस्टी! दारू का, तुम्हारे लाने तो जहर भी पी सके हैं राजा... इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल के बीच नैन मटकइया... दइया रे दइया... कहने को हम इंडियन पीनल कोड फॉलो करते हैं, लेकिन काम करना पड़ता है इंडियन पॉलिटिकल कोड के अधीन... लोकतंत्र के चौथे खंभे को ही गिरा दोगे का? खंभा हो न तो चुपचाप खंभा जैसे खड़े रहो, कोई नहीं गिरा रहा.. इतने बड़े एमएलए के घर में रात दिहाड़े चोरी हो गई, कोई काम की नहीं है पुलिस... चोरों का स्टैंडर्ड कितना गिर गया है... कटहल चुरा रहे हैं... राजनीति में जो काम सदाचार और उच्च विचार से नहीं होते न... कभी-कभी अचार से हो जाते हैं... शक तो बहुतों पर है, पर क्या करें... बिन देखे चोर भाई बराबर... यहां कोई सीधे मुंह बात ही नहीं करता... तो तुम उल्टे मुंह जवाब दे दिया करो... देखो... हम तुम्हारी दीदी नहीं हैं... हमारे बहुत भाई हैं... हमारी तो न्यूज देखा कीजिए भइया... ऐसा लगेगा... भांग के दो गोले चढ़ा लिए हैं... मन एकदम भनभना गया है... चोर लेडीज सैंडल पहनकर कटहल चुराने आया होगा क्या? दामाद जी... तुम बेबी को बहुत डॉमिनेटिंग करत हो.. तुम हो का यार... हू आर यू? हम कोई आटू-**टू बंदर बाटू नहीं हैं... विधायक गजेंद्र प्रताप गज्जू के लड़का हैं हम... हमारे पिता विधायक नहीं रहे तो क्या हम कटहल चुराकर खाएंगे? कटहल नहीं मिले तो धरना करेंगे... सत्याग्रह करेंगे... तुम बस कर्म करो और कटहल की चिंता करो... कटहल... कटहल... कटहल... एक ऐसा फल, जिसने पूरे मोबा में मचा दी हलचल ..