अमर उजाला
Fri, 24 January 2025
प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ में उन्होंने शुक्रवार 24 जनवरी को संन्यास लिया, पहले उन्होंने अपना पिंडदान किया फिर उनका पट्टाभिषेक हुआ
ममता ने पहले पिंडदान प्रक्रिया की, फिर उनका पट्टाभिषेक किया गया, यह पूरी प्रक्रिया किन्नर अखाड़े में संपन्न हुई
कहा जाता है कि पिंडदान के बाद एक बार फिर स्नान होता है, इसके बाद शुद्धिकरण हो जाने के बाद गुरु की ओर से भभूत, कपड़े और कंठी माला दी जाती है
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की उपस्थिति में पट्टाभिषेक प्रक्रिया संपन्न हुई
ममता ने संन्यास लेने के फैसले पर कहा, 'यह महादेव और महाकाली का आदेश था', महामंडलेश्वर बनने के बाद ममता का नाम अब श्रीयामाई कुलकर्णी है
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