अमर उजाला
Wed, 23 April 2025
23 अप्रैल को मनोज बाजपेयी अपना 56वां जन्मदिन मना रहे हैं, चलिए इस मौके पर जानते हैं उनके दमदार किरदारों के बारे में
राम गोपाल वर्मा ने मनोज को ऑडिशन के लिए बुलाया था। मनोज का थिएटर बैकग्राउंड और बेतिया के एक स्थानीय व्यक्ति होने के कारण राम ने उन्हें तुरंत साइन कर लिया।
निर्देशक राम गोपाल वर्मा 'सत्या' के बाद मनोज से प्रभावित थे। उन्होंने मनोज को एक गंभीर, लीड रोल ऑफर किया।
निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने मनोज को उनकी गंभीर अभिनय शैली के लिए चुना। मनोज ने रोल की तैयारी के लिए बंटवारे की किताबें पढ़ीं और यश चोपड़ा ने इस किरदार को देखकर उन्हें 'वीर-जारा' ऑफर की थी।
प्रकाश झा ने मनोज को पहले 'गंगाजल' में एक छोटा रोल दिया था। उनकी प्रतिभा देखकर झा ने 'राजनीति' में उन्हें यह बड़ा किरदार ऑफर किया।
अनुराग कश्यप ने मनोज को पहले 'शूल' में छोटा रोल दिया था। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के लिए अनुराग को ऐसा अभिनेता चाहिए था, जो बिहारी किरदार की गहराई समझे, जिसके लिए उन्हें मनोज को लिया।
निर्देशक हंसल मेहता ने मनोज को 'शाहिद' में देखा था। वे चाहते थे कि यह रोल कोई ऐसा अभिनेता करे, जो सच्चाई को पर्दे पर उतारे।
राज और डीके ने मनोज को उनकी फिल्म 'शोर इन द सिटी' में देखा था। मनोज को यह रोल इसलिए पसंद आया, क्योंकि यह उनके मध्यमवर्गीय बैकग्राउंड से जुड़ा था।
निर्देशक देवाशीष मखीजा ने मनोज को 'ओजस' नामक एक शॉर्ट फिल्म में देखा था। वे चाहते थे कि मनोज इस रोल में अपनी सादगी दिखाएं। मनोज ने मुंबई की चॉल में समय बिताकर किरदार को समझा।
निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने मनोज को 'भैया जी' में देखा था। वे चाहते थे कि यह रोल कोई ऐसा अभिनेता करे, जो आम आदमी की ताकत दिखाए।
निर्देशक कनु बहल ने मनोज को 'तितली' में देखा था। वे चाहते थे कि मनोज इस किरदार को निभाएं। मनोज ने बताया कि उन्होंने पत्रकारों के साथ समय बिताकर किरदार की बारीकियां समझीं।
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