सुरों के बेताज बादशाह थे मोहम्मद रफी

अमर उजाला

Sun, 5 March 2023

Image Credit : सोशल मीडिया

मोहम्मद रफी हिंदी सिनेमा के ऐसे फनकार थे, जिनको आज भी लोग उनके गानों के माध्यम से याद करते हैं
 

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रफी ने हिंदी के अलावा असामी, कोंकणी, भोजपुरी, ओड़िया, पंजाबी, बंगाली, मराठी, सिंधी, कन्नड़, गुजराती...
 

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तेलुगू, माघी, मैथिली, उर्दू, इंग्लिश, फारसी, अरबी और डच भाषाओं में भी गीत गाए हैं 
 
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मोहम्मद रफी का निक नेम 'फीको' था और बचपन से ही फकीरों को सुनते हुए उन्होंने गाना शुरू कर दिया था
 

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मोहम्मद रफी ने उस्ताद अब्दुल वाहिद खान, पंडित जीवन लाल मट्टू और फिरोज निजामी से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली थी
 

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रफी साहब ने सबसे पहले लाहौर में पंजाबी फिल्म गुल बलोच के लिए गोरिये नी, हीरिये न गाना गाया था
 

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