इन गुणों की बतौलत भारत रत्न बने पंडित भीमसेन जोशी

अमर उजाला

Wed, 24 January 2024

Image Credit : Social media

पंडित भीमसेन जोशी की आज पुण्यतिथि है, महान शास्त्रीय संगीत गायक का जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक में हुआ
 

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बचपन से ही भीमसेन को संगीत का बहुत शौक था, उन्होंने अब्दुल करीम खान की 'राग वसंत' में 'फगवा' 'बृज देखन को' और 'पिया बिना नहि आवत चैन' ठुमरी सुनी

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यहीं से उनके मन में संगीत के प्रति रुचि बढ़ गई और वे गुरु की तलाश में घर से निकल गए थे, अगले दो वर्षों तक वे बीजापुर, पुणे और ग्वालियर में रहे, तब वे 11 वर्ष के थे

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ग्वालियर में उन्होंने उस्ताद हाफिज अली खान से भी संगीत की शिक्षा ली और अब्दुल करीम खान के शिष्य पंडित रामभाऊ कुंडालकर से उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शुरुआती शिक्षा ली

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भीमसेन ने संगीत के क्षेत्र में दुनियाभर में भारत का कद बढ़ाने में अहम योगदान दिया, उन्हें 'पिया मिलन की आस', 'जो भजे हरि को सदा', 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' जैसे गानों के लिए याद किया जाता है

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भीमसेन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था, उन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण समेत कई अन्य प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स दिए गए, लंबी बीमारी के बाद 24 जनवरी 2011 को उनका निधन हो गया

Image Credit : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

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