सनी देओल के 10 डायलॉग, जिन पर बजीं सीटियां

अमर उजाला

Wed, 22 February 2023

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गदर एक प्रेम कथा- अशरफ अली, आपका पाकिस्तान जिंदाबाद है, इससे हमें कोई एतराज नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद है, जिंदाबाद था और जिंदाबाद रहेगा

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फिल्म गदर का एक और डायलॉग है- अगर मैं अपने बीवी बच्चों के लिए सिर झुका सकता हूं तो सबके सिर काट भी सकता हूं
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गदर फिल्म- दुनिया जानती है कि बंटवारे के वक्त हम लोगों ने आप लोगों को 65 करोड़ रुपये दिए थे, तब जाकर आपके छत पर तिरपाल आई थी। बरसात से बचने की हैसियत नहीं और गोलीबारी की बात कर रहे हैं आप लोग
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फिल्म दामिनी का फेमस डायलॉग है- जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पे पड़ता है तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है

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फिल्म दामिनी से एक और डायलॉग है- तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख, हमेशा तारीख पे तारीख मिलती रही है लेकिन इंसाफ नहीं मिला माई लॉर्ड, इंसाफ नहीं मिला, मिली है तो सिर्फ ये तारीख

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फिल्म घातक का डायलॉग लोग आज भी नहीं भूले हैं, इसमें डायलॉग है- ये मजदूर का हाथ है कात्या, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है

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फिल्म घातक का और डायलॉग है- लोगों को केवल वही डराकर रखते हैं, जिनकी हड्डियों में पानी भरा हो

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नो इफ नो बट ओनली जट्ट,  यह डायलॉग फिल्म जो बोले सो निहाल से है

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फिल्म बॉर्डर का फेमस डायलॉग है- मरकर किसी ने लड़ाई नहीं जीती, लड़ाई जीती जाती है दुश्मन को खत्म करके

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बलि हमेशा बकरे की दी जाती है..शेर की नहीं, यह डायलॉग सनी की फिल्म सिंह साब द ग्रेट का है
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इंसानियत का मजहब हर मजहब से ऊंचा होता है- यह डायलॉग फिल्म द हीरो-लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई का है

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ब्लेजर-पैंट्स संग बिकिनी पहन उर्फी ने किया खेल

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