कभी साउंड इंजीनियर के रूप में काम करते थे तपन हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक तपन सिन्हा की आज बर्थ एनिवर्सरी है दो अक्तूबर 1924 को जन्मे तपन का रुख बचपन में सिनेमा की ओर नहीं था, उन्होंने फिजिक्स में स्नातक किया था, उनके पिता वैज्ञानिक थे तपन सिन्हा 1946 में कोलकाता के न्यू थिएटर से जुड़े थे, यहां उन्हें साउंड इंजीनियर की जिम्मेदारी दी गई थी फिर यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ धीरे-धीरे तपन का रुझान फिल्मों की ओर बढ़ने लगा, वह साल 1950 में ब्रिटेन के पाइनवुड स्टूडियो से जुड़े और दो साल वहां बिताए भारत लौटने के बाद तपन ने अपना ध्यान फिल्म निर्देशन की ओर बढ़ाया, उस दौरान उन्होंने बांग्ला, हिंदी और उड़िया भाषा में फिल्में बनाईं फिल्म जगत में तपन का जादू यूं चला कि उन्हें अलग-अलग कैटिगरी में 19 नेशनल अवॉर्ड मिले, 2006 में उन्हें बाबा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया उनकी फिल्में बर्लिन, लंदन और मॉस्को जैसे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में सराही गई थीं...15 जनवरी 2009 को तपन दुनिया को अलविदा कह गए -----