जिस आदमी से हमें काम लेना है, उससे वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे जिस आदमी से हमें काम लेना है, उससे हमें वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे, जैसे एक शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मधुर आवाज़ में गाता है असंभव शब्द का प्रयोग तो केवल कायर करते हैं, बुद्धिमानी ज्ञानी व्यक्ति अपना रास्ता खुद बनाते हैं। भगवान मूर्तियों में नहीं है. आपकी अनुभूति आपका इश्वर है. आत्मा आपका मंदिर है वो व्यक्ति जो दूसरों के गुप्त दोषों के बारे में बातें करते हैं, वे अपने आप को बांबी में आवारा घूमने वाले सांपों की तरह बर्बाद कर लेते हैं. जो अपने निश्चित कर्मों का त्याग करके,और अनिश्चित की चिंता करता है,उसका अनिश्चित लक्ष्य तो नष्ट होता ही है, साथ में निश्चित भी नष्ट हो जाता है. जिस आदमी से हमें काम लेना है, उससे वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे