इन बड़े निर्देशकों ने डॉक्यूमेंट्री से भी कमाया नाम

अमर उजाला

Wed, 26 June 2024

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भारतीय फिल्म जगत में एक से बढ़कर एक निर्देशक हैं, इनमें से कुछ केवल फिल्म बनाने तक ही सीमित हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने डॉक्यूमेंट्री के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी है

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प्रकाश झा, मीरा नायर, विधु विनोद चोपड़ा और रितुपर्णो घोष ऐसे ही निर्दशक हैं, जो सामाजिक रूप से गंभीर मुद्दों पर डॉक्यूमेंट्री बना चुके हैं

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प्रकाश झा ने साल 1981 में 'फेसिस आफ्टर द स्टोर्म' नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसमें बिहार में हुई सांप्रदायिक हिंसा को दिखाया गया था, साल 1983 में उन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता था

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रितुपर्णो घोष ने 'जीवन स्मृति' नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई है, इसमें रवींद्रनाथ टैगोर की जिंदगी के कुछ अहम पलों को दिखाया गया हैं, वैसे उनके सिनेमा में महिलाओं का जीवन, उनकी भावनाएं और उनके दुख बारीकी से देखने को मिलते हैं
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'सलाम बॉम्बे' फिल्म बनाकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकीं मीरा नायर ने कन्या भ्रूण हत्या के विषय पर 'चिल्ड्रन ऑफ ए डिजायर्ड सेक्स' नाम से डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जो गर्भपात के मामले पर बात करती है
 

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विधु विनोद चोपड़ा भी डॉक्यूमेंट्री के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का नमूना पेश कर चुके हैं, उन्होंने 'एन एनकाउंटर विद फेसिस' नाम से एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसमें मुंबई की सड़कों पर रहने वाले बच्चों की कहानी दिखाई गई थी

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