हिंदी फिल्मों में ग्रामीण जीवन कम ही देखने को मिलता है, अधिकतर फिल्में शहरी पृष्ठभूमि पर ही आधारित होती है
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ग्रामीण पृष्ठभूमि पर कम ही सही, लेकिन कई कमाल की फिल्में बन चुकी हैं
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'लगान' फिल्म को आशुतोष गोवारिकर ने डायरेक्ट किया था, फिल्म क्रिकेट पर आधारित है, जिसमें ग्रामीण अंग्रेजों से लगान माफ कराने के लिए क्रिकेट खेलते हैं
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'लगान' के बाद आशुतोष गोवारिकर ने 'स्वदेश' बनाई थी, इसमें दिखाया गया है कि जब नासा का प्रोजेक्ट मैनेजर गांव पहुंचकर वहां के हालात से रुबरू होता है तो क्या-क्या होता है
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2010 में रिलीज हुई फिल्म 'पीपली लाइव' किसान आत्महत्या पर आधारित है
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किरण राव की फिल्म ‘लापता लेडीज’ भी ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी एक कमाल की फिल्म है, जिसमें महिला के आत्मनिर्भर बनने और उनकी आजादी से जुड़े सवाल उठाए गए हैं
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'कल्कि 2898 एडी' में इतनी देर स्क्रीन पर दिखेंगे कमल हासन