‘आफताब-ए-सितार’ विलायत खान को नहीं मिला उचित सम्मान, दो बार ठुकराया पद्म विभूषण

अमर उजाला

Thu, 13 March 2025

Image Credit : इंस्टाग्राम- @ustad_vilayat_khan_fan_club_

शास्त्रीय संगीत की दुनिया के बादशाह कहे जाने वाले उस्ताद विलायत खान का जन्म 28 अगस्त 1928 को तत्कालीन ब्रिटिश भारत (बांग्लादेश) में हुआ था।

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पिता की मृत्यु के बाद खान साहब ने अपने चाचा और मामा से सितार वादन की शिक्षा ली। उन्होंने परिवार में पांच पीढ़ियों से चली आ रही सितार वादन की परंपरा को धार देने का काम किया।

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आठ वर्ष की उम्र में पहली बार सितार वादन की रिकॉर्डिंग हुई और मंच मिला, फिर उन्होंने पांच दशकों तक अपनी बादशाहत कायम रखी।

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पूर्व राष्ट्रपति फखरूद्दीन अहमद भी उनकी इस कला के दीवाने थे। उन्होंने ही विलायत खान साहब को ‘आफताब-ए-सितार’ का खिताब दिया था।

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खान साहब अपने बेबाक और जिद्दी स्वभाव के लिए काफी चर्चित थे। उन्होंने एक बार पद्म भूषण और दो बार पद्म विभूषण सम्मान को स्वीकार करने से मना कर दिया था।

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सम्मान ठुकराने को लेकर उन्होंने तर्क दिया कि उनके शास्त्रीय संगीत को भारत सरकार ने सही सम्मान नहीं दिया।

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साथ ही उन्होंने कहा कि वह कोई भी ऐसा पुरस्कार नहीं लेंगे, जो दूसरे सितार वादक को उनसे पहले मिल चुका है।

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कहा जाता है कि खान साहब पहले ऐसे संगीतकार थे, जिन्होंने आजादी के बाद इंग्लैंड में जाकर संगीत कार्यक्रम किया था।

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उस्ताद विलायत खान साहब का 13 मार्च 2004 को कैंसर से निधन हो गया था।

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सौम्या टंडन की खूबसूरत अदाएं

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