अमर उजाला
Thu, 10 October 2024
आज जगजीत सिंह की डेथ एनिवर्सरी है
इस मौके पर हम उनकी गाई हुई कुछ सदाबहार गजलों पर नजर डालते हैं
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
झुकी झुकी सी नजर बे-करार है कि नहीं
तेरे बारे में जब सोचा नहीं था
तेरे आने की जब खबर महके
प्यार का पहला खत लिखने में वक्त तो लगता है
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यू नहीं जाता
सरकती जाए है रुख से नकाब आहिस्ता आहिस्ता
ठुकराओ अब कि प्यार करो मैं नशे में हूं
टीवी से फिल्मों तक में छाए यश दासगुप्ता