अमर उजाला
Tue, 29 April 2025
केदार शर्मा 1940-50 के दशक में बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक, लेखक और गीतकार रहे हैं।
12 अप्रैल 1910 को ब्रिटिश इंडिया के नारोवाल पंजाब में जन्मे केदार शर्मा का निधन 29 अप्रैल 1999 को 89 वर्ष की उम्र में हुआ। आज उनकी 26वीं पुण्यतिथि है।
केदार शर्मा ने अपने करियर की शुरूआत फिल्मों में स्टिल फोटोग्राफर के तौर पर की थी। बाद में उन्होंने पोस्टर पेंटर के तौर पर भी काम किया।
केदार शर्मा को अपना पहला बड़ा ब्रेक मिला साल 1936 में आई कुंदल सहगल की फिल्म ‘देवदास’ से। इस फिल्म में उन्होंने डायलॉग और गीत लिखे थे।
‘देवदास’ न सिर्फ फिल्म हिट हुई, बल्कि इसके गाने भी सुपरहिट हुए। फिल्म के गीत ‘बलम आये बसो मेरे नैनन में’ और ‘दुख के अब दिन बीतत नाहीं’ जैसे गीत पूरे देश में काफी पसंद किए गए।
केदार शर्मा को निर्देशन में बड़ा मौका साल 1940 में आई फिल्म ‘तुम्हारी जीत’ से मिला। इसके बाद उन्होंने ‘औलाद’ और ‘दिल ही तो है’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया।
केदार शर्मा ने अपने करियर में कई बड़े दिग्गज कलाकारों को लॉन्च किया है। इनमें राज कपूर और मधुबाला से लेकर गीता बाली, भारत भूषण, माला सिन्हा और तनुजा के नाम शामिल हैं।
केदार शर्मा को करियर की सबसे बड़ी हिट 1941 में आई ‘चित्रलेखा’ के रूप में मिली। उन्होंने अपने करियर में ‘नील कमल’, ‘बावरे नैन’, ‘जोगन’ और ‘मुमताज महल’ जैसी कई सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया।
1950 के दशक के अंत में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने केदार शर्मा के गीत सुने थे। उन्होंने उन्हें बाल फिल्म सोसाइटी का मुख्य निदेशक बनने के लिए कहा।
जिसके बाद केदार शर्मा ने चिल्ड्रन्स फिल्म सोसाइटी के लिए कई फिल्मों पर काम किया। जिसमें फिल्म ‘जलदीप’ भी शामिल है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय प्रशंसा मिली।
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