अमर उजाला
Mon, 14 April 2025
आवाज की जादूगरी से आज भी दर्शकों के दिलों में राज करने वाली शमशाद बेगम का जन्म 14 अप्रैल 1919 को अमृतसर में हुआ था।
रेडियो से गायन करियर शुरू करने के बाद शमशाद बेगम ने अपने करियर में करीब 6000 गाने गाए, उन्हें पहली बार गाने के लिए फीस के रूप में 15 रुपये मिले थे।
40-50 के दशक में गायिका का सिक्का चला करता था। उनके द्वारा गाए गाने 'मेरे पिया गए रंगून' और 'कजरा मोहब्बत वाला' आज भी लोगों के जुबां पर हैं।
शमशाद बेगम एक मुस्लिम परिवार से आतीं थीं, लेकिन गायिका का दिल एक हिंदू व्यक्ति गणपत लाल पर आ गया, जो पेशे से वकील थे।
दोनों के परिवार वालों के द्वारा भारी विरोध के बावजूद इन्होंने सबके खिलाफ जाकर शादी कर ली। शादी के समय गायिका की उम्र महज 15 की थी।
उस दौर में शमशाद बेगम एक ऐसी प्लेबैक सिंगर थीं, जिनकी डिमांड सबसे ज्यादा थी।
शमशाद बेगम ने कई प्रसिद्ध गाने गाए, जिनमें ‘लेके पहला पहला प्यार', 'कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना', ‘सइयां दिल में आना रे’, ‘बूझ मेरा क्या नाम रे’ जैसे अनगिनत गाने हैं, जिन्होंने दर्शकों का मन मोह लिया था।
संगीत की दुनिया में शमशाद बेगम के शानदार योगदान के लिए उन्हें 2009 में पद्म भूषण अवार्ड से नवाजा गया।
साल 2013 में 23 अप्रैल को शमशाद बेगम ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया और उनकी आवाज सदा के लिए अमर हो गई।
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