अमर उजाला
Tue, 1 December 2020
अभिनेता पंकज त्रिपाठी आज किसी भी पहचान के मोहताज नहीं हैं
This browser does not support the video element.
पंकज त्रिपाठी का जन्म बिहार के गोपालगंज में हुआ और वो एक किसान परिवार से हैं
पंकज ने पटना से 12वीं पास की और घर वालों, मित्रों के कहने पर होटल मैनेजमेंट के एक छोटे से कोर्स में एडमिशन ले लिया
इसी दौरान वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क में आए
This browser does not support the video element.
छात्र राजनीति के दिनों में एक आंदोलन के दौरान उन्हें सात दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा
उसी दौरान उन्होंने पटना में एक प्ले ‘अंधा कुआं’ देखा जिससे प्रभावित होकर उन्होंने थिएटर कलाकार बनने की ठानी
पटना में पंकज कालीदास रंगालय से जुड़ गए और उसके बाद बिहार आर्ट थिएटर से 2 साल तक जुड़े रहे
This browser does not support the video element.
होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग के लिए पटना के होटल मौर्या में नाइट शिफ्ट में किचन सुपरवाइजर की जॉब भी मिल गई
दो साल तक उनका रुटीन था रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक होटल में रहना, दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक थिएटर में रहना
दो साल तक लगातार रिजेक्ट होने के बाद उन्हें एनएसडी से चिट्ठी आई और वो होटल की नौकरी छोड़कर दिल्ली रवाना हो गए
This browser does not support the video element.
पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में अभिषेक बच्चन और भूमिका चावला स्टारर फिल्म रन से की थी
पंकज को स्टार बनाने वाली फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर के लिए अनुराग ने उनका आठ घंटे तक ऑडिशन लिया था
फिल्म न्यूटन के लिए पंकज त्रिपाठी को नेशनल अवॉर्ड भी मिल चुका है
This browser does not support the video element.
पंकज ने कुछ ही समय में कड़े संघर्ष के बाद इंडस्ट्री में वो मुकाम हासिल कर लिया है जिसके कई लोग केवल सपने ही देख पाते हैं
बॉलीवुड अभिनेत्रियों के साइड बिजनेस