अमर उजाला
Wed, 23 April 2025
साल 2025 के अमर उजाला संवाद में अजहर इकबाल ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने मंच से कई मशहूर शेर सुनाए। पढ़ते हैं उनके कुछ चुनिंदा शेर…
जिंदगी के सारे कथानक बदल जाएंगे
रूप के सारे मानक बदल जाएंगे।
दर्द के गीत बजते रहेंगे यूं ही
गाने वाले अचानक बदल जाएंगे।
मरुस्थल से यकायक जैसे जंगल हो गए हैं
तेरा सानिध्य पाकर हम मुकम्मल हो गए हैं।
बदन के नक्शे पे हर तिल को सो सो बार देखा
उसे इतना पढ़ा हमने के पागल हो गए हैं।
कठिन थे रस्ते, किसी से फरियाद कर ना पाए
खुशी को आनंद, दुःख को अवसाद कर ना पाए ।
अब उनकी आवाज गूंजती है हर एक कदम पर
पिता जीवित थे तो उनसे संवाद कर ना पाए।
बात बनाओ बात बनाती अच्छी लगती हो
खाओ झूठी कसमें अच्छी लगती हो।
सिगरेट बस यूं पीता हूं तुम मना करो मुझको
तुम समझाओ तुम समझाती अच्छी लगती हो।
किसी के होने का एहसास होने लगता है
ये दर्द अब तो अनायास होने लगता है।
कुछ एक दिन को बुरी लगती है ये तन्हाई
फिर उसके बाद तो अभ्यास होने लगता है।
इतना संगीन पाप कौन करे?
मेरे दुख पर विलाप कौन करे
चेतना मर चुकी है लोगों की
पाप पर पश्चाताप कौन करे?
उस अप्सरा को अगर आंख भर के देखे कोई
खुदा के होने पे विश्वास होने लगता है।
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