अमर उजाला
Tue, 21 July 2020
जरी के डिजाइन मिलाकर बुनने से तैयार होने वाली सुंदर रेशमी साड़ी को बनारसी साड़ी कहते हैं
त्योहार हो या शादी ब्याह, बनारसी साड़ियों का क्रेज कभी कम नहीं होता
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मौसम कोई भी हो मगर बनारसी साड़ी की डिमांड हमेशा रहती है
चंदौली, बनारस, जौनपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर और संत रविदासनगर में बनारसी साड़ियां बनाई जाती हैं
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यहां साड़ी बनाने का ये पारंपरिक काम सदियों से चला आ रहा है और विश्वप्रसिद्ध है
बनारसी साड़ी मुगलकाल के दौरान अस्तित्व में आई इसीलिए इसके डिजाइन मुगल-प्रेरित है
परम्परागत मोटिफ जो बनारसी साड़ी की पहचान बनाए हुए हैं, जैसे बूटी, बूटा, कोनिया, बेल, जाल और जंगला, झालर आदि
बनारसी साड़ी पर बने डिजाइन पारंपरिक होते हैं और इसके पल्लू में छह से आठ इंच लंबा प्लेन सिल्क फैब्रिक होता है
एक बनारसी साड़ी को बनाने में 15 दिन से एक महीने तक का समय लग सकता है
एक बनारसी साड़ी में 5600 के आसपास धागों के तार होते हैं जो 45 इंच तक चौड़े होते हैं
बनारसी सिल्क साड़ी को दूसरे कपड़ों के साथ रखने की गलती कभी न करें
बनारसी सिल्क साड़ी को साफ करते वक्त कभी भी ब्रश का इस्तेमाल न करें
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