Urdu Poetry: होश वाले हो तो हर बात को समझा न करो

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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लफ़्ज़ ओ मंज़र में मआनी को टटोला न करो
होश वाले हो तो हर बात को समझा न करो
- महमूद अयाज़

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हमी वो इल्म के रौशन चराग़ हैं जिन को
हवा बुझाती नहीं है सलाम करती है
- ख़ालिद नदीम शानी

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दौलत नहीं काम आती जो तक़दीर बुरी हो
क़ारून को भी अपना ख़ज़ाना नहीं मिलता
- मिर्ज़ा रज़ा बर्क़  

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शायरी है सरमाया ख़ुश-नसीब लोगों का
बाँस की हर इक टहनी बाँसुरी नहीं होती
- हस्तीमल हस्ती 

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उस की आँखों में उतर जाने को जी चाहता है
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है
- कफ़ील आज़र अमरोहवी 

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घर में क्या आया कि मुझ को
दीवारों ने घेर लिया है
- मोहम्मद अल्वी 

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गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं ने
वो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने
- जौन एलिया 

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