भगत सिंह के कुछ पसंदीदा अशआर

अमर उजाला

Wed, 22 March 2023

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दैर नहीं हरम नहीं दर नहीं आस्ताँ नहीं 
बैठे हैं रहगुज़र पे हम ग़ैर हमें उठाए क्यूँ 

-मिर्ज़ा ग़ालिब

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नशा पिला के गिराना तो सबको आता है
मज़ा तो जबकि गिरतों को थाम ले साक़ी

- अल्लामा इक़बाल
 

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दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे 
जो ग़म की घड़ी को  भी ख़ुशी से गुज़ार दे 

-दाग़ देहलवी

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रहेगी आबोहवा में ख़याल की बिजली
ये मुश्त ख़ाक है फ़ानी रहे रहे न रहे ।

-बृज नारायण चकबस्त
 
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अहमद फ़राज़ के शेर

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