अमर उजाला
Wed, 22 March 2023
दैर नहीं हरम नहीं दर नहीं आस्ताँ नहीं
बैठे हैं रहगुज़र पे हम ग़ैर हमें उठाए क्यूँ
-मिर्ज़ा ग़ालिब
नशा पिला के गिराना तो सबको आता है
मज़ा तो जबकि गिरतों को थाम ले साक़ी
- अल्लामा इक़बाल
दिल दे तो इस मिज़ाज का परवरदिगार दे
जो ग़म की घड़ी को भी ख़ुशी से गुज़ार दे
-दाग़ देहलवी
अहमद फ़राज़ के शेर