अमर उजाला
Mon, 12 January 2026
दो घड़ी दर्द ने आँखों में भी रहने न दिया
हम तो समझे थे बनेंगे ये सहारे आँसू
~ हकीम नासिर
आग दुनिया की लगाई हुई बुझ जाएगी
कोई आँसू मिरे दामन पे बिखर जाने दे
~ नज़ीर बाक़री
रोने वाले तुझे रोने का सलीक़ा ही नहीं
अश्क पीने के लिए हैं कि बहाने के लिए
~ आनंद नारायण मुल्ला
उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा
~ साहिर लुधियानवी
Urdu Poetry: यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए