Hindi Shayari: आदिल मंसूरी के चुनिंदा शेर

अमर उजाला

Mon, 1 May 2023

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क्यूँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो 
तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो 
 

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ऐसे डरे हुए हैं ज़माने की चाल से 
घर में भी पाँव रखते हैं हम तो सँभाल कर 
 

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सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा 
जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के 
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दरवाज़ा खटखटा के सितारे चले गए 
ख़्वाबों की शाल ओढ़ के मैं ऊँघता रहा 
 
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हुदूद-ए-वक़्त से बाहर अजब हिसार में हूँ 
मैं एक लम्हा हूँ सदियों के इंतिज़ार में हूँ 
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ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी 
फल से भरपूर तो हो लेने दो 
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Hindi Shayari: 'रिहाई' पर कहे गए शेर

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