Hindi Shayari: आदिल मंसूरी के चुनिंदा शेर क्यूँ चलते चलते रुक गए वीरान रास्तो तन्हा हूँ आज मैं ज़रा घर तक तो साथ दो ऐसे डरे हुए हैं ज़माने की चाल से घर में भी पाँव रखते हैं हम तो सँभाल कर सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के दरवाज़ा खटखटा के सितारे चले गए ख़्वाबों की शाल ओढ़ के मैं ऊँघता रहा हुदूद-ए-वक़्त से बाहर अजब हिसार में हूँ मैं एक लम्हा हूँ सदियों के इंतिज़ार में हूँ ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी फल से भरपूर तो हो लेने दो Hindi Shayari: आदिल मंसूरी के चुनिंदा शेर