अमर उजाला
Tue, 24 June 2025
इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई
हम डूब के समझे हैं दरिया तिरी गहराई
~ मुज़फ़्फ़र रज़्मी
गुलाबों की तरह दिल अपना शबनम में भिगोतें हैं
मोहब्बत करने वाले ख़ूबसूरत लोग होते हैं
~बशीर बद्र
मेरी ग़ुरबत ने मुझसे मेरी दुनिया छीन ली "हाफ़ी"
मेरी अम्मा तो कहती थीं कि पैसा कुछ नहीं होता
~ तहज़ीब हाफ़ी
आँगन में ये रात की रानी साँपों का घर काट इसे
कमरा अलबत्ता सूना है कोने में गुलदान लगा
~ मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
Urdu Poetry: सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन