Urdu Poetry: हम डूब के समझे हैं दरिया तिरी गहराई

अमर उजाला

Tue, 24 June 2025

Image Credit : social media

इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई 
हम डूब के समझे हैं दरिया तिरी गहराई 

~ मुज़फ़्फ़र रज़्मी 

Image Credit : social media

गुलाबों की तरह दिल अपना शबनम में भिगोतें हैं
मोहब्बत करने वाले ख़ूबसूरत लोग होते हैं

~बशीर बद्र 

Image Credit : social media

मेरी ग़ुरबत ने मुझसे मेरी दुनिया छीन ली "हाफ़ी"
मेरी अम्मा तो कहती थीं कि पैसा कुछ नहीं होता

~ तहज़ीब हाफ़ी

Image Credit : social media

हर चंद रास्ते में थे काँटे बिछे हुए
जिस को तेरी तलब थी गुज़रता चला गया

~ अब्दुल हमीद अदम
Image Credit : social media

आँगन में ये रात की रानी साँपों का घर काट इसे
कमरा अलबत्ता सूना है कोने में गुलदान लगा

~ मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

Image Credit : social media

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है
चले आओ जहाँ तक रौशनी मा'लूम होती है

~नुशूर वाहिदी
Image Credit : social media

Urdu Poetry: सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन

Read Now