Urdu Poetry: कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है

अमर उजाला

Wed, 4 March 2026

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यहाँ मज़बूत से मज़बूत लोहा टूट जाता है 
कई झूटे इकट्ठे हों तो सच्चा टूट जाता है 
~हसीब सोज़
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इलाज-ए-दर्द-ए-दिल तुम से मसीहा हो नहीं सकता 
तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता 
~मुज़्तर ख़ैराबादी
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ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना 
बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता
~ जावेद अख़्तर
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हम तोहफ़े में घड़ियाँ तो दे देते हैं
इक दूजे को वक़्त नहीं दे पाते हैं
~फ़रीहा नक़वी
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दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं
लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं
~क़तील शिफ़ाई

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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
~क़तील शिफ़ाई
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