Hindi Shayari: 'एहसासों की गहराई' पर कहे गए शेर

अमर उजाला

Sat, 5 July 2025

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ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है 
रहे सामने और दिखाई न दे 

~ बशीर बद्र

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तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया 
ख़ुश हूँ कि कुछ न कुछ तो मिरे पास रह गया 

~ अब्दुल हमीद अदम

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हर तरफ़ अपने ही अपने हाए तन्हाई न पूछ 
किस क़दर खलती है अक्सर हम को बीनाई न पूछ 

~ अदील ज़ैदी
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औरों की आग क्या तुझे कुंदन बनाएगी 
अपनी भी आग में कभी चुप-चाप जल के देख 

~ आबिदा करामत
 

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मौत की पहली अलामत साहिब 
यही एहसास का मर जाना है 

~ इदरीस बाबर
 

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कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की 
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की 

~ नईम सरमद
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Urdu Poetry: इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा

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