अमर उजाला
Sat, 5 July 2025
ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
~ बशीर बद्र
तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया
ख़ुश हूँ कि कुछ न कुछ तो मिरे पास रह गया
~ अब्दुल हमीद अदम
औरों की आग क्या तुझे कुंदन बनाएगी
अपनी भी आग में कभी चुप-चाप जल के देख
~ आबिदा करामत
मौत की पहली अलामत साहिब
यही एहसास का मर जाना है
~ इदरीस बाबर
Urdu Poetry: इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चाँद निकलेगा