अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ये दश्त वो है जहाँ रास्ता नहीं मिलता
अभी से लौट चलो घर अभी उजाला है
- अख़्तर सईद ख़ान
किस से पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ कई बरसों से
हर जगह ढूँढ़ता फिरता है मुझे घर मेरा
- निदा फ़ाज़ली
मुझ को अक्सर उदास करती है
एक तस्वीर मुस्कुराती हुई
- विकास शर्मा राज़
कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए
उस की तस्वीर हटा दी जाए
- मोहम्मद अल्वी
धोका है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल
सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है
- राजेश रेड्डी
तिरे आने का दिन है तेरे रस्ते में बिछाने को
चमकती धूप में साए इकट्ठे कर रहा हूँ मैं
- अहमद मुश्ताक़
Urdu Poetry: जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथ