अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
ऐ काश हमारी क़िस्मत में ऐसी भी कोई शाम आ जाए
इक चाँद फ़लक पर निकला हो इक चाँद सर-ए-बाम आ जाए
- अनवर मिर्ज़ापुरी
दिल की बाज़ी ऐसी बाज़ी है जिस में हम
हारें भी तो जीत मनाई जा सकती है
- रेनू नय्यर
पानी में अक्स और किसी आसमाँ का है
ये नाव कौन सी है ये दरिया कहाँ का है
- अहमद मुश्ताक़
बात पेड़ों की नहीं, ग़म है परिंदों का 'नदीम'
घोंसले जिन के कोई तोड़ दिया करता था
- नदीम भाभा
साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
- आल-ए-अहमद सुरूर
दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के क़ाबिल
जिस शख़्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया हो
- अज्ञात
Urdu Poetry: तमाम उम्र ख़ुशी की तलाश में गुज़री