Urdu Poetry: मुझे दुनिया के ता'नों पर कभी ग़ुस्सा नहीं आता

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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मुझे दुनिया के ता'नों पर कभी ग़ुस्सा नहीं आता
नदी की तह में जा के सारे पत्थर बैठ जाते हैं
- मुकेश आलम 

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आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें
दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की
- जलील मानिकपुरी

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मुझ से तू पूछने आया है वफ़ा के मअ'नी
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को
- क़तील शिफ़ाई

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यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए
बज़्म में गोया मिरी जानिब इशारा कर दिया
- फ़ानी बदायूंनी 

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Urdu Poetry: मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा

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