अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
अदाएँ देखने बैठे हो क्या आईने में अपनी
दिया है जिस ने तुम जैसे को दिल उस का जिगर देखो
- बेख़ुद देहलवी
निगाहें इस क़दर क़ातिल कि उफ़ उफ़
अदाएँ इस क़दर प्यारी कि तौबा
- आरज़ू लखनवी
इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
- मिर्ज़ा ग़ालिब
इश्क़ में कुछ नज़र नहीं आया
जिस तरफ़ देखिए अँधेरा है
- नूह नारवी
Urdu Poetry: नींद क्यूँ रात भर नहीं आती