अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मौत का एक दिन मुअ'य्यन है
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती
- मिर्ज़ा ग़ालिब
कौन ये ले रहा है अंगड़ाई
आसमानों को नींद आती है
- फ़िराक़ गोरखपुरी
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
इस के ब'अद आए जो अज़ाब आए
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न जाने कौन सी मंज़िल पे इश्क़ आ पहुँचा
दुआ भी काम न आए कोई दवा न लगे
- अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी
Urdu Poetry: जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है